महाभारत 13.2.41
तामथौघवतीं राजन्स पावकसुतोऽब्रवीत्अतिथेः प्रतिकूलं ते न कर्तव्यं कथंचन
tāmathaughavatīṃ rājansa pāvakasuto'bravītatitheḥ pratikūlaṃ te na kartavyaṃ kathaṃcana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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