महाभारत 13.2.52
तामब्रवीत्ततो विप्रो राजपुत्रीं सुदर्शनाम्त्वया ममार्थः कल्याणि निर्विशङ्के तदाचर
tāmabravīttato vipro rājaputrīṃ sudarśanāmtvayā mamārthaḥ kalyāṇi nirviśaṅke tadācara
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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