महाभारत 13.2.57
अथेध्मान्समुपादाय स पावकिरुपागमत्मृत्युना रौद्रभावेन नित्यं बन्धुरिवान्वितः
athedhmānsamupādāya sa pāvakirupāgamatmṛtyunā raudrabhāvena nityaṃ bandhurivānvitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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