महाभारत 13.2.74
यथैषा नानृता वाणी मयाद्य समुदाहृतातेन सत्येन मां देवाः पालयन्तु दहन्तु वा
yathaiṣā nānṛtā vāṇī mayādya samudāhṛtātena satyena māṃ devāḥ pālayantu dahantu vā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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