महाभारत 13.2.95
य इदं कथयेद्विद्वानहन्यहनि भारतसुदर्शनस्य चरितं पुण्याँल्लोकानवाप्नुयात्
ya idaṃ kathayedvidvānahanyahani bhāratasudarśanasya caritaṃ puṇyām̐llokānavāpnuyāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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