महाभारत 13.22.19
कन्यां तां प्रतिगृह्यैव भार्यां परमशोभनाम्उवास मुदितस्तत्र आश्रमे स्वे गतज्वरः
kanyāṃ tāṃ pratigṛhyaiva bhāryāṃ paramaśobhanāmuvāsa muditastatra āśrame sve gatajvaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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