महाभारत 13.24.46
अन्नेनान्नं च यो लिप्सेत्कर्मार्थं चैव भारतआमन्त्रयति राजेन्द्र तस्याधर्मोऽनृतं स्मृतम्
annenānnaṃ ca yo lipsetkarmārthaṃ caiva bhārataāmantrayati rājendra tasyādharmo'nṛtaṃ smṛtam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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