महाभारत 13.26.26
कौशन्ते च कुशस्तम्बे द्रोणशर्मपदे तथाआपःप्रपतने स्नातः सेव्यते सोऽप्सरोगणैः
kauśante ca kuśastambe droṇaśarmapade tathāāpaḥprapatane snātaḥ sevyate so'psarogaṇaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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