महाभारत 13.26.33
गङ्गाह्रद उपस्पृश्य तथा चैवोत्पलावनेअश्वमेधमवाप्नोति तत्र मासं कृतोदकः
gaṅgāhrada upaspṛśya tathā caivotpalāvaneaśvamedhamavāpnoti tatra māsaṃ kṛtodakaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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