महाभारत 13.26.4तपोवनगतं विप्रमभिगम्य महामुनिम्पप्रच्छाङ्गिरसं वीर गौतमः संशितव्रतःtapovanagataṃ vipramabhigamya mahāmunimpapracchāṅgirasaṃ vīra gautamaḥ saṃśitavrataḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें