महाभारत 13.27.22
तौ समेत्य महात्मानौ सुखासीनौ कथाः शुभाःचक्रतुर्वेदसंबद्धास्तच्छेषकृतलक्षणाः
tau sametya mahātmānau sukhāsīnau kathāḥ śubhāḥcakraturvedasaṃbaddhāstaccheṣakṛtalakṣaṇāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें