महाभारत 13.27.52
देवाः सोमार्कसंस्थानि यथा सत्रादिभिर्मखैःअमृतान्युपजीवन्ति तथा गङ्गाजलं नराः
devāḥ somārkasaṃsthāni yathā satrādibhirmakhaiḥamṛtānyupajīvanti tathā gaṅgājalaṃ narāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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