Loading
महाभारत 13.27.66
जात्यन्धैरिह तुल्यास्ते मृतैः पङ्गुभिरेव चसमर्था ये न पश्यन्ति गङ्गां पुण्यजलां शिवाम्
jātyandhairiha tulyāste mṛtaiḥ paṅgubhireva casamarthā ye na paśyanti gaṅgāṃ puṇyajalāṃ śivām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें