महाभारत 13.28.20
ब्राह्मण्यां वृषलाज्जातं पितर्वेदयतीह माम्अमानुषी गर्दभीयं तस्मात्तप्स्ये तपो महत्
brāhmaṇyāṃ vṛṣalājjātaṃ pitarvedayatīha māmamānuṣī gardabhīyaṃ tasmāttapsye tapo mahat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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