महाभारत 13.28.3
तपसा वा सुमहता कर्मणा वा श्रुतेन वाब्राह्मण्यमथ चेदिच्छेत्तन्मे ब्रूहि पितामह
tapasā vā sumahatā karmaṇā vā śrutena vābrāhmaṇyamatha cedicchettanme brūhi pitāmaha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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