महाभारत 13.31.11स वीतहव्यदायादैरागत्य पुरुषर्षभगङ्गायमुनयोर्मध्ये संग्रामे विनिपातितःsa vītahavyadāyādairāgatya puruṣarṣabhagaṅgāyamunayormadhye saṃgrāme vinipātitaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें