महाभारत 13.31.52
अनुजानीहि मां ब्रह्मन्ध्यायस्व च शिवेन माम्त्याजितो हि मया जातिमेष राजा भृगूद्वह
anujānīhi māṃ brahmandhyāyasva ca śivena māmtyājito hi mayā jātimeṣa rājā bhṛgūdvaha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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