महाभारत 13.32.17
भैक्ष्यचर्यासु निरताः कृशा गुरुकुलाश्रयाःनिःसुखा निर्धना ये च तान्नमस्यामि यादव
bhaikṣyacaryāsu niratāḥ kṛśā gurukulāśrayāḥniḥsukhā nirdhanā ye ca tānnamasyāmi yādava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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