महाभारत 13.33.13
नानाकर्मसु युक्तानां बहुकर्मोपजीविनाम्धर्मज्ञानां सतां तेषां नित्यमेवानुकीर्तयेत्
nānākarmasu yuktānāṃ bahukarmopajīvināmdharmajñānāṃ satāṃ teṣāṃ nityamevānukīrtayet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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