महाभारत 13.35.21
न ब्राह्मणविरोधेन शक्या शास्तुं वसुंधराब्राह्मणा हि महात्मानो देवानामपि देवताः
na brāhmaṇavirodhena śakyā śāstuṃ vasuṃdharābrāhmaṇā hi mahātmāno devānāmapi devatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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