महाभारत 13.35.23
प्रतिग्रहेण तेजो हि विप्राणां शाम्यतेऽनघप्रतिग्रहं ये नेच्छेयुस्तेऽपि रक्ष्यास्त्वयानघ
pratigraheṇa tejo hi viprāṇāṃ śāmyate'naghapratigrahaṃ ye neccheyuste'pi rakṣyāstvayānagha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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