महाभारत 13.39.5
शम्बरस्य च या माया या माया नमुचेरपिबलेः कुम्भीनसेश्चैव सर्वास्ता योषितो विदुः
śambarasya ca yā māyā yā māyā namucerapibaleḥ kumbhīnaseścaiva sarvāstā yoṣito viduḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें