महाभारत 13.39.8
अनृतं सत्यमित्याहुः सत्यं चापि तथानृतम्इति यास्ताः कथं वीर संरक्ष्याः पुरुषैरिह
anṛtaṃ satyamityāhuḥ satyaṃ cāpi tathānṛtamiti yāstāḥ kathaṃ vīra saṃrakṣyāḥ puruṣairiha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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