महाभारत 13.4.10
प्रत्याख्याय पुनर्यान्तमब्रवीद्राजसत्तमःशुल्कं प्रदीयतां मह्यं ततो वेत्स्यसि मे सुताम्
pratyākhyāya punaryāntamabravīdrājasattamaḥśulkaṃ pradīyatāṃ mahyaṃ tato vetsyasi me sutām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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