महाभारत 13.4.43
प्रसादयन्त्यां भार्यायां मयि ब्रह्मविदां वरप्रसादं कुरु विप्रर्षे न मे स्यात्क्षत्रियः सुतः
prasādayantyāṃ bhāryāyāṃ mayi brahmavidāṃ varaprasādaṃ kuru viprarṣe na me syātkṣatriyaḥ sutaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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