महाभारत 13.4.55महानृषिश्च कपिलस्तथर्षिस्तारकायनःतथैव चोपगहनस्तथर्षिश्चार्जुनायनःmahānṛṣiśca kapilastatharṣistārakāyanaḥtathaiva copagahanastatharṣiścārjunāyanaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें