महाभारत 13.40.10
क्रोधं कामस्य देवेशः सहायं चासृजत्प्रभुःअसज्जन्त प्रजाः सर्वाः कामक्रोधवशं गताः
krodhaṃ kāmasya deveśaḥ sahāyaṃ cāsṛjatprabhuḥasajjanta prajāḥ sarvāḥ kāmakrodhavaśaṃ gatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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