महाभारत 13.40.23
अप्रमत्तेन ते भाव्यं सदा प्रति पुरंदरम्स हि रूपाणि कुरुते विविधानि भृगूद्वह
apramattena te bhāvyaṃ sadā prati puraṃdaramsa hi rūpāṇi kurute vividhāni bhṛgūdvaha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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