महाभारत 13.40.33शुकवायसरूपी च हंसकोकिलरूपवान्सिंहव्याघ्रगजानां च रूपं धारयते पुनःśukavāyasarūpī ca haṃsakokilarūpavānsiṃhavyāghragajānāṃ ca rūpaṃ dhārayate punaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें