महाभारत 13.41.9
तमेवंवादिनं शक्रं शुश्राव विपुलो मुनिःगुरुपत्न्याः शरीरस्थो ददर्श च सुराधिपम्
tamevaṃvādinaṃ śakraṃ śuśrāva vipulo muniḥgurupatnyāḥ śarīrastho dadarśa ca surādhipam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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