महाभारत 13.44.38
पाणौ गृहीता तत्रैव विसृज्या इति मे पिताअब्रवीदितरां कन्यामावहत्स तु कौरवः
pāṇau gṛhītā tatraiva visṛjyā iti me pitāabravīditarāṃ kanyāmāvahatsa tu kauravaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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