महाभारत 13.44.54
अनुकूलामनुवंशां भ्रात्रा दत्तामुपाग्निकाम्परिक्रम्य यथान्यायं भार्यां विन्देद्द्विजोत्तमः
anukūlāmanuvaṃśāṃ bhrātrā dattāmupāgnikāmparikramya yathānyāyaṃ bhāryāṃ vindeddvijottamaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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