महाभारत 13.45.6
एतत्तु नापरे चक्रुर्न परे जातु साधवःसाधूनां पुनराचारो गरीयो धर्मलक्षणम्
etattu nāpare cakrurna pare jātu sādhavaḥsādhūnāṃ punarācāro garīyo dharmalakṣaṇam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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