महाभारत 13.46.8
ईर्ष्यवो मानकामाश्च चण्डा असुहृदोऽबुधाःस्त्रियो माननमर्हन्ति ता मानयत मानवाः
īrṣyavo mānakāmāśca caṇḍā asuhṛdo'budhāḥstriyo mānanamarhanti tā mānayata mānavāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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