महाभारत 13.47.60
हरेज्ज्येष्ठः प्रधानांशमेकं तुल्यासुतेष्वपिमध्यमो मध्यमं चैव कनीयांस्तु कनीयसम्
harejjyeṣṭhaḥ pradhānāṃśamekaṃ tulyāsuteṣvapimadhyamo madhyamaṃ caiva kanīyāṃstu kanīyasam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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