महाभारत 13.48.16
ते चापि सदृशं वर्णं जनयन्ति स्वयोनिषुपरस्परस्य वर्तन्तो जनयन्ति विगर्हितान्
te cāpi sadṛśaṃ varṇaṃ janayanti svayoniṣuparasparasya vartanto janayanti vigarhitān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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