महाभारत 13.48.23
वैदेहकाच्च पापिष्ठं क्रूरं भार्योपजीविनम्निषादान्मद्रनाभं च खरयानप्रयायिनम्
vaidehakācca pāpiṣṭhaṃ krūraṃ bhāryopajīvinamniṣādānmadranābhaṃ ca kharayānaprayāyinam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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