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महाभारत 13.49.17
अन्यत्र क्षेत्रजः पुत्रो लक्ष्यते भरतर्षभन ह्यात्मा शक्यते हन्तुं दृष्टान्तोपगतो ह्यसौ
anyatra kṣetrajaḥ putro lakṣyate bharatarṣabhana hyātmā śakyate hantuṃ dṛṣṭāntopagato hyasau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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