महाभारत 13.49.21
अस्वामिकस्य स्वामित्वं यस्मिन्संप्रतिलक्षयेत्सवर्णस्तं च पोषेत सवर्णस्तस्य जायते
asvāmikasya svāmitvaṃ yasminsaṃpratilakṣayetsavarṇastaṃ ca poṣeta savarṇastasya jāyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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