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महाभारत 13.49.22
युधिष्ठिर उवाच · yudhiṣṭhira uvāca
कथमस्य प्रयोक्तव्यः संस्कारः कस्य वा कथम्देया कन्या कथं चेति तन्मे ब्रूहि पितामह
kathamasya prayoktavyaḥ saṃskāraḥ kasya vā kathamdeyā kanyā kathaṃ ceti tanme brūhi pitāmaha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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