महाभारत 13.49.2
विप्रवादाः सुबहुशः श्रूयन्ते पुत्रकारिताःअत्र नो मुह्यतां राजन्संशयं छेत्तुमर्हसि
vipravādāḥ subahuśaḥ śrūyante putrakāritāḥatra no muhyatāṃ rājansaṃśayaṃ chettumarhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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