महाभारत 13.5.5स तीक्ष्णविषदिग्धेन शरेणातिबलात्कृतःउत्सृज्य फलपत्राणि पादपः शोषमागतःsa tīkṣṇaviṣadigdhena śareṇātibalātkṛtaḥutsṛjya phalapatrāṇi pādapaḥ śoṣamāgataḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें