महाभारत 13.50.13जालं च योजयामासुर्विशेषेण जनाधिपमत्स्योदकं समासाद्य तदा भरतसत्तमjālaṃ ca yojayāmāsurviśeṣeṇa janādhipamatsyodakaṃ samāsādya tadā bharatasattamaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें