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महाभारत 13.50.25
प्राणोत्सर्गं विक्रयं वा मत्स्यैर्यास्याम्यहं सहसंवासान्नोत्सहे त्यक्तुं सलिलाध्युषितानिमान्
prāṇotsargaṃ vikrayaṃ vā matsyairyāsyāmyahaṃ sahasaṃvāsānnotsahe tyaktuṃ salilādhyuṣitānimān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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