महाभारत 13.52.12
यत्तु तावदतिक्रान्तं धर्मद्वारं तपोधनतत्कार्यं प्रकरिष्यामि तदनुज्ञातुमर्हसि
yattu tāvadatikrāntaṃ dharmadvāraṃ tapodhanatatkāryaṃ prakariṣyāmi tadanujñātumarhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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