महाभारत 13.52.33यथादेशं महर्षेस्तु शुश्रूषापरमौ तदाबभूवतुर्महाराज प्रयतावथ दंपतीyathādeśaṃ maharṣestu śuśrūṣāparamau tadābabhūvaturmahārāja prayatāvatha daṃpatīइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें