महाभारत 13.52.39
स मुहूर्तं समाश्वस्य सह देव्या महाद्युतिःपुनरन्वेषणे यत्नमकरोत्परमं तदा
sa muhūrtaṃ samāśvasya saha devyā mahādyutiḥpunaranveṣaṇe yatnamakarotparamaṃ tadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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