महाभारत 13.52.6
कथं पुत्रानतिक्रम्य तेषां नप्तृष्वथाभवत्एष दोषः सुतान्हित्वा तन्मे व्याख्यातुमर्हसि
kathaṃ putrānatikramya teṣāṃ naptṛṣvathābhavateṣa doṣaḥ sutānhitvā tanme vyākhyātumarhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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