महाभारत 13.53.2
भीष्म उवाच · bhīṣma uvāca
अदृष्ट्वा स महीपालस्तमृषिं सह भार्ययापरिश्रान्तो निववृते व्रीडितो नष्टचेतनः
adṛṣṭvā sa mahīpālastamṛṣiṃ saha bhāryayāpariśrānto nivavṛte vrīḍito naṣṭacetanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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