महाभारत 13.53.36
नोत्सार्यः पथिकः कश्चित्तेभ्यो दास्याम्यहं वसुब्राह्मणेभ्यश्च ये कामानर्थयिष्यन्ति मां पथि
notsāryaḥ pathikaḥ kaścittebhyo dāsyāmyahaṃ vasubrāhmaṇebhyaśca ye kāmānarthayiṣyanti māṃ pathi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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